Gati Kise Kahate Hain (1)

Gati Kise Kahate Hain-गति किसे कहते हैं ?

Gati Kise Kahate Hain:हेलो स्टूडेंट्स, आज हमने यहां पर गति की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण के बारे में विस्तार से बताया हैGati Kise Kahate Haine Kahate Hain । यह हर कक्षा की परीक्षा में पूछा जाने वाले यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

Gati Kise Kahate Hain

संसार की प्रत्येक वस्तु प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गतिमान है। हमारा चलना, दौड़ना, साईकिल चलाना आदि पृथ्वी का अपना धुरी पर घूर्णन करना

तथा वर्ष में एक बार सूर्य की परिक्रमा पूरी करना।

सूर्य भी अपने ग्रहो सहित विचरण करता हैं।

गति की परिभाषा (Motion) –

वस्तु की स्थिति में परिवर्तन गति कहलाती है। अर्थात जब कोई वस्तु अपने चारो और कि वस्तुओं की अपेक्षा अपनी स्थिति बदलती रहती है तो वस्तु की बदली हुई स्थिति को गति कहते है। जैसे-चलता हुआ आदमी, गतिमान वाहन, बहती हुई नदी आदि

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गति के प्रकार

गतिशील वस्तुओं की गति अनेक प्रकार की होती है। जैसे-सरल रेखीय गति, वृतीय गति, घूर्णन गति, आवर्ती गति, दोलन / कम्पन गति।

  • सरल रेखीय गति (Linear Motion)

जब कोई वस्तु सरल रेखा में गति करती है तो उसकी गति सर रेखीय गति कहलाती है। जैसे सड़क पर दौड़ते वाहनों की गति, दौड़ते खिलाड़ी की गति आदि सरल रेखीय गति के उदाहरण है।

  • वृतीय गति (Circular Motion)

जब कोई वस्तु किसी निश्चित बिन्दु के चारों ओर एक निश्चित दूरी पर वृत्ताकार मार्ग पर चक्कर लगाती है तो उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है। जैसे सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति, पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति, घड़ी की सुइयों की गति, कोल्हू चलाते हुये बैल की गति आदि वृत्तीय गति के उदाहरण हैं।

  • घूर्णन गति (Rotational Motion) –

जब कोई वस्तु अपनी धुरी या अक्ष के चारों ओर घूमते है तो उसकी गति घूर्णन गति कहलाती है। जैसे बर्तन बनाने वाले कुम्हार के चाक की गति, घूमती फिरकी की गति, घिरनी की गति आदि घूर्णन गति के उदाहरण हैं।

  • आवर्ती गति  (Recurring Speed) –

जब कोई गति करती हुई वस्तु एक निश्चित समय के बाद अपनी गति को दोहराती है तो उसकी गति आवर्ती गति कहलाती है। जैसे-सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति, घड़ी की सुइयों की गति आदि आवर्ती गति के उदाहरण हैं।

  • दोलन / कम्पन गति (Oscillatory Motion)

जब कोई वस्तु अपनी मध्य स्थिति के दोनों ओर सरल रेखा में गति करता है तो उसकी गति दोलन / कम्पन गति कहलाती है।  जैसे झूले में झूलते बच्चे की गति, दीवार घड़ी के पेण्डुलम की गति आदि दोलन गति के उदाहरण हैं।

  • लोटनी गति –

रोलिंग एक प्रकार की गति है जो एक सतह के संबंध में उस वस्तु के रोटेशन और अनुवाद को जोड़ती है, जैसे कि, यदि आदर्श स्थितियां मौजूद हों, तो दोनों बिना खिसके एक दूसरे के संपर्क में हों। रोलिंग जहां कोई स्लाइडिंग नहीं है, उसे शुद्ध रोलिंग कहा जाता है।

गति के समीकरण

यह निम्न प्रकार से हैं-

1.प्रथम समीकरण

v = u + at

जहां, u – प्रारम्भिक वेग

v – अंतिम वेग

a – त्वरण

t – समय

सर आइजेक न्यूटन ने सबसे पहले 1687‌ में अपनी पुस्तक प्रिंसिपिया में गति के नियम दिए। न्यूटन के अनुसार गति के तीन नियम होते हैं जो निम्नलिखित हैं-

  • गति का प्रथम नियम

इसे जड़त्व का नियम या Law of inertia भी कहते हैं। न्यूटन के शब्दों में इस नियम में बताया गया है “प्रत्येक वस्तु अपने स्थिरावस्था अथवा एकसमान वेगावस्था मे तब तक रहती है जब तक उसे किसी बाह्य कारक (बल) द्वारा अवस्था में बदलाव के लिए प्रेरित नहीं किया जाता।” इसका अर्थ यह है कि गति के प्रथम नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु स्थिर अवस्था में है तो वह स्थिर अवस्था में ही रहेगी और यदि कोई वस्तु गतिशील अवस्था में है तो वह गतिशील ही रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल नहीं लगाया जाए इसे ही जड़त्व का नियम कहते हैं।

उदाहरण- पेड़ पर लगे फल स्थिर अवस्था में रहते हैं जब तक कि उस पर कोई बल ना लगाया जाए और यदि उस पेड़ को हिला दिया जाए तो उस पर से फल फूल गिरने लगते हैं।

  • गति का द्वितीय नियम

गति के द्वितीय नियम को संवेग का नियम भी कहतेGati Kise Kahate Hain हैं। न्यूटन के अनुसार ” किसी वस्तु के संवेग मे आया बदलाव उस वस्तु पर आरोपित बल (Force) के समानुपाती (Directly proposnal) होता है तथा समान दिशा में घटित होता है। “

उदाहरण- तेजी से आती हुई गेंद को कैच करने के लिए गेंदबाज अपने हाथों को हल्का पीछे की ओर ले जाता है ताकि गेंद का वेट कम हो सके और उसे चोट ना लगे।

  • गति का तृतीय नियम

गति के तृतीय नियम को क्रिया प्रतिक्रिया का नियम भी कहतेGati Kise Kahate Hain हैं। इस नियम के अनुसार यदि किसी वस्तु पर एक दिशा से क्रिया होती है तो विपरीत दिशा से उस पर प्रतिक्रिया भी होती है यही क्रिया प्रतिक्रिया का नियम है।

उदाहरण- यदि हम बंदूक से गोली चलाते हैं तो गोली आगे की ओर जाती है तथा हमें पीछे की ओर झटका लगता है या एक बल का अनुभव होता है यही क्रिया प्रतिक्रिया का नियम है।

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credit:PCM subject learning

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