Kahani Kise Kahate Hain

Kahani Kise Kahate Hain

Kahani Kise Kahate Hain: हेलो स्टूडेंट्स, आज हमने यहां पर कहानी की परिभाषा, प्रकार और उदाहरणKahani Kise Kahate Hainके बारे में विस्तार से बताया है। यह हर कक्षा की परीक्षा में पूछा जाने वाले यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

Kahani Kise Kahate Hain

साहित्य की सभी विधाओ में कहानी सबसे पुरानी विधा हैं. जनजीवन में यह सबसे लोकप्रिय विधा हैं. प्राचीन कालो में कहानियों को, कथा, आख्यायिका, गल्प आदि कहा जाता था. आज के समय में कहानी सबसे अधिक प्रचलित है. साहित्य में यह अब अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है. पहले के समय मे कहानी उपदेश देना या मनोरंजन करना माना जाता था. आज इसका लक्ष्य मानव जीवन की विभिन्न समस्याओं और संवेदनाओ को व्यक्त करना है. Kahani Kise Kahate Hainयही कारण है कि प्राचीन काल की कहानी से आज की कहानी बिल्कुल भिन्न हो गयी है, आज आधुनिक काल में इसकी आत्मा भी बदली है और शैली भी.

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कहानी किसे कहते हैं?

कहानी गद्य साहित्य की वह सबसे अधिक रोचक एवं लोकप्रिय विधा है, जो जीवन के किसी विशेष पक्ष का मार्मिक, भावनात्मक और कलात्मक वर्णन करती है। “हिन्दी गद्य की वह विधा है जिसमे लेखक किसी घटना, पात्र अथवा समस्या का क्रमबद्ध ब्यौरा देता है, जिसे पढ़कर एक समन्वित प्रभाव उत्पन्न होता है, उसे कहानी कहते हैं”।

अथवा “कहानी वह विधा है जो लेखक के किसी उद्देश्य किसी एक मनोभाव जैसे उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास, सब कुछ उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं”

कहानी का आरंभ मनुष्य के जन्म से ही माना जाता है। कहानी उपन्यास की तरह लम्बी नहीं होती हैं, यह किसी महत्त्वपूर्ण घटना पर आधारित होता है, यह किसी के जीवन का एक घटना पर आधारित होता है।

प्राचीनकाल में प्रचलित वीरों तथा राजाओं के शौर्य, प्रेम, न्याय, ज्ञान, वैराग्य, साहस, समुद्री यात्रा, अगम्य पर्वतीय प्रदेशों में प्राणियों का अस्तित्व आदि की कथाएँ, जिनकी कथानक घटना प्रधान हुआ करती थीं, भी कहानी के ही रूप हैं।

कहानी लेखन के तत्व

कहानी के कुछ विशेष तत्व होते हैं जो कहानी में रस भरते हैं। कहानी लेखन के 6 तत्व  निम्नलिखित हैं-

कथावस्तु

चरित्र-चित्रण

कथोपकथन

देशकाल

भाषा-शैली

उद्देश्य

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कहानी के प्रमुख तत्व निम्नलिखित है –

१. कथावस्तु –

‘संक्षिप्तता’ कहानी के कथानक का अनिवार्य गुण है। वैसे तो कथानक की पांच दशाएं होती हैआरंभ – कहानी का आरंभ किसी समस्या, या मुद्दे को उजागर करते हुए होती है। यह विषय किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो सकता है।

  • विकास – कहानी का धीरे-धीरे विकास होता जाता है। नायक अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए या विपत्ति से निकलने के लिए संघर्ष करता हुआ दिखता है।
  • कोतुहल – इस समय पाठक कहानी से अधिक जुड़ जाता है। यह कहानी का मूल रस प्रदान करने का समय होता है जहां पाठक स्वयं को कहानी का नायक मानने लगता है।
  • चरमसीमा – नायक अपने उद्देश्य की प्राप्ति तथा समस्याओं से बाहर निकलने के लिए अंतिम संघर्ष की स्थिति में रहता है। Kahani Kise Kahate Hainजहां पाठक स्वयं को कहानी से जोड़ कर उस पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहता है।
  • अंत – यहां नायक अपने उद्देश्यों की प्राप्ति करता है और कहानी का समापन होता है। उद्देश्य की पूर्ति अथवा समस्या पर विजय प्राप्त के साथ कहानी का अंत होता है।

२. पात्र का चरित्र चित्रण –

आधुनिक कहानी में यथार्थ को मनोविज्ञान पर बल दिया जाने लगा है अंत उसमें चरित्र चित्रण को अधिक महत्व दी गई है। अब घटना और कार्य व्यापार के स्थान पर पात्र और उसका संघर्ष ही कहानी की मूल धुरी बन गए हैं।

कहानी के छोटे आकार तथा तीव्र प्रभाव के कारण सीमित होती है और दूसरे पात्र के सबसे अधिक प्रभाव पूर्ण पक्ष की उसके व्यक्तित्व कि केवल सर्वाधिक पुष्ट तत्व की झलक ही प्रस्तुत की जाती है।

अज्ञेय की शत्रु कहानी में एक ही मुख्य पात्र है, जैनेंद्र के खेल कहानी में चरित्र-चित्रण में मनोविज्ञान आधार ग्रहण किया गया है। अतः कहानी के पात्र वास्तविक सजीव स्वाभाविक तथा विश्वसनीय लगते हैं। पात्रों का चरित्र आकलन लेखक प्राया दो प्रकार से करता है। प्रत्यक्ष या वर्णात्मक शैली द्वारा इसमें लेखक स्वयं पात्र के चरित्र में प्रकाश डालता है।

परोक्ष या नाट्य शैली में पात्र स्वयं अपने वार्तालाप और क्रियाकलापों द्वारा अपने गुण-दोषों का संकेत देते चलते हैं।Kahani Kise Kahate Hain इन दोनों में कहानीकार को दूसरी पद्धति अपनानी चाहिए इससे कहानी में विश्वसनीयता एवं स्वाभाविकता आ जाती है।

३. वातावरण

कहानी में भौतिक वातावरण के लिए विशेष स्थान नहीं होता फिर भी इनका संक्षिप्त वर्णन पात्र के जीवन को उसकी मनः स्थिति को समझने में सहायक होता है।

मानसिक वातावरण कहानी का परम आवश्यक तत्व है।Kahani Kise Kahate Hain प्रसाद की ‘पुरस्कार’ कहानी में ‘मधुलिका’ का चरित्र चित्रण में भौतिक और मानसिक वातावरण की सुंदरता सृष्टि हुई है।

ऐतिहासिक कहानी में भौतिक वातावरण , मानसिक कहानी का अतिरिक्त महत्व होता है , क्योंकि उसी के द्वारा लेखक पाठक को युग विशेष में ले जाता है और सच्ची झांकी को पेश करता है।

४. संवाद या कथोपकथन

कहानी में स्थगित कथन लंबे चौड़े भाषण या तर्क-वितर्क पूर्ण संवादों के लिए कोई स्थान नहीं होता। नाटकीयता लाने के लिए छोटे-छोटे संवादों का प्रयोग किया जाता है।

संवादों से आरंभ होने वाली कहानी वास्तव में प्रभावी होती है।

संवाद , देश काल , पात्र और परिस्थिति के अनुरुप होनी चाहिए।

वह संक्षिप्त रोचक तर्कयुक्त तथा प्रवाहमय हो उनका कार्य कथा को आगे बढ़ाना , पात्रों के चरित्र पर प्रकाश डालना , विचार विशेष का प्रतिपादन करना होता है।

५. भाषा शैली

कहानी को प्रभावशाली बनाने के लिए लेखक को थोड़े में बहुत कुछ कहने की कला में निपुण होना चाहिए। लेखक का भाषा पर पूर्ण अधिकार हो कहानी की भाषा सरल , स्पष्ट व विषय अनुरूप हो।

उसमें दुरूहता ना होकर प्रभावी होना चाहिए , कहानीकार अपने विषय के अनुरूप ही शैली का चयन कर सकता है।

वह आत्मकथात्मक, रक्षात्मक, डायरी, नाटकीय शैली का प्रयोग कर सकता है।

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६. उद्देश्य

प्राचीन कहानी का उद्देश्य मात्र मनोरंजन या उपदेशात्मक था किंतु आज विविध सामाजिक परिस्थितियां जीवन के प्रति विशेष दृष्टिकोण या किसी समस्या का समाधान और जीवन मूल्यों का उद्घाटन आदि कहानी के उद्देश्य होते हैं यहां उल्लेखनीय हैKahani Kise Kahate Hain कि कहानी का मूल्यांकन करते समय उसमें निर्मिति और एकता का होना आवश्यक होता है कहानी यदि पाठक के मन पर अद्भुत प्रभाव डालती है तो कहानीकार का उद्देश्य पूर्ण हो जाता है।

अतः कहानी कला के शास्त्रीय नियमों की अपेक्षा उसकी अत्यंत प्रभाव क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती है।

आर्टिकल में अपने पढ़ा कि कहानी  किसे कहते हैं, हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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