Varna Kise Kahate Hain

Varna Kise Kahate Hain- वर्ण किसे कहते है ( परिभाषा, भेद और उदाहरण )

Varna Kise Kahate Hain:हेलो स्टूडेंट्स, आज हमने यहां पर वर्ण की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण के बारे में विस्तार से बताया है।Varna Kise Kahate Hain यह हर कक्षा की परीक्षा में पूछा जाने वाले यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

हिंदी व्याकरण के तीन भाग होते हैं: वर्ण, शब्द एवं वाक्य विचार। वर्ण विचार हिन्दी व्याकरण का पहला भागVarna Kise Kahate Hain है। इसके बाद हम शब्द और वाक्य विचार के बारे में पढ़ेंगे-

Varna Kise Kahate Hain

भाषा की ध्वनियों को लिखने हेतु उनके लिए कुछ लिपि (चिह्न) का प्रयोग किया जाता है। ध्वनियों के इन्हीँ लिपि (चिह्नों) को ‘वर्ण’ कहा जाताVarna Kise Kahate Hain है। यह भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है।

वर्ण के भेद-वर्णमाला

वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिन्दी वर्णमाला में कुल 52 वर्ण होते हैं वर्णमाला भी वर्ण किसे कहते है के अंतर्गत आते हैं ।

वर्णमाला के दो भाग होते हैं

  • स्वर
  • व्यंजन

स्वर किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता है, अर्थात जिन वर्णों को हम बिना किसी दुसरे वर्णों की सहायता के बोल सकतेVarna Kise Kahate Hain है, उन्हें स्वर कहते हैं। हिन्दी वर्णमाला में 11 स्वर होते हैं।

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

इनके अलावां इन वर्णाक्षर को भी स्वर माने जाते हैं

अं—पंचम वर्ण-ङ्, ञ्, ण्, न्, म् का नासिकीकरण करने के लिए (अनुस्वार)

अः—अघोष “ह्” (निःश्वास) के लिए (विसर्ग)

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स्वर तीन प्रकार के होते हैं

  • ह्रस्व स्वर
  • दीर्घ स्वर
  • प्लुत स्वर

ह्रस्व स्वर-

जिन स्वरों के उच्चारण में कम-से-कम समय लगता हैं उन्हें ह्रस्व स्वर कहतेVarna Kise Kahate Hain हैं। ये चार हैं-अ, इ, उ, ऋ। इन्हें मूल स्वर भी कहते हैं।

दीर्घ स्वर-

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों से दुगुना समय लगता है उन्हें दीर्घ स्वर कहतेVarna Kise Kahate Hain हैं। ये हिन्दी में सात हैं-आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।

प्लुत स्वर-

ऐसे स्वर जिनके उच्चारण में हृस्व स्वर से तीन गुना अधिक समय लगता है एवं दीर्घ स्वर से थोड़ा ज़्यादा समय लगताVarna Kise Kahate Hain है। प्लुत स्वरों का यह चिह्न ‘ऽ’ होता है। जैसे: राऽऽम, ओऽऽम्।

व्यंजन किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी दुसरे वर्णों के नहीं हो सकता उन्हें व्यंजन कहते हैं। हिन्दी वर्णमाला में 36 व्यंजन होते हैं।

क्   ख्   ग्   घ्   ड़्

च्    छ्   ज्   झ्  ञ्

ट्    ठ्    ड्    ढ्   ण्

त्    थ्    द्    ध्   न्

प्    फ्   ब्    भ्   म्

य्    र्    ल्    व्

श्   ष्    स्    ह्

क्ष   त्र    ज्ञ    श्र

इसके अलावा दो द्विगुण व्यंजन (ड़ ढ़) को भी व्यंजन माना जाता है।

व्यंजन के भेद

व्यंजन के तीन भेद होते हैं-

  • स्पर्श व्यंजन
  • अंतःस्थ व्यंजन
  • ऊष्म व्यंजन

स्पर्श व्यंजन –

ऐसे व्यंजन जिनका उच्चारण करते समय जीभ कण्ठ, तालु, मूर्धा, दाँत, अथवा होठ का स्पर्श करती है, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते है।

इन्हें 5 वर्गों में बांटा गया है। ये निम्नलिखित 25 हैं-

‘क’ वर्ग-क, ख, ग, घ, ड़ (कण्ठ से बोले जाने वाले)

‘च’ वर्ग-च, छ, ज, झ, ञ (तालू से बोले जाने वाले)

‘ट’ वर्ग-ट, ठ, ड, ढ, ण (मूर्धा से बोले जाने वाले)

‘त’ वर्ग-त, थ, द, ध, न (दंत्त से बोले जाने वाले)

‘प’ वर्ग-प, फ, ब, भ, म (होस्ट से बोले जाने वाले)

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अंतःस्थ व्यंजन –

ऐसे व्यंजन जो उच्चारण करते समय हमारे मुख के भीतर ही रह जाते हैं, वे व्यंजन अंतःस्थ व्यंजन कहलाते हैं। इनकों अद्र्ध स्वर भी कहा जाता है। । ये निम्नलिखित चार हैं- य् र् ल् व्

ऊष्म व्यंजन –

ऐसे वर्ण जिनका उच्चारण करते समय वायु मुख से रगड़ खाकर ऊष्मा पैदा करती है यानी उच्चारण के समय मुख से गर्म हवा निकलती है। उष्म व्यंजन कहलाते हैं।

ऊष्म व्यंजन चार होते हैं: श, ष, स, ह।

  • सयुंक्त व्यंजन

ऐसे व्यंजन जो दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल से बनते हैं, वे सयुंक्त व्यंजन कहलाते हैं।

हिन्दी वर्णमाला में कुल चार सयुंक्त व्यंजन है: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र।

क्ष = क् + ष + अ = क्ष

त्र = त् + र् + अ = त्र

ज्ञ = ज् + ञ + अ = ज्ञ

श्र = श् + र् + अ = शश्र

आर्टिकल में अपने पढ़ा कि वर्ण किसे कहते हैं, हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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