Yamak Alankar Kise Kahate Hain

Yamak Alankar Kise Kahate Hain

Yamak Alankar Kise Kahate Hain: हेलो स्टूडेंट्स, आज हमने यहां पर यमक अलंकार की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण के बारे में विस्तार से बताया है।Yamak Alankar Kise Kahate Hainयह हर कक्षा की परीक्षा में पूछा जाने वाले यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

Yamak Alankar Kise Kahate Hain

जब कविता में एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए और उसका अर्थ हर बार भिन्न-भिन्न हो वहां पर यमक अलंकार होता है।

यमक अलंकार एक प्रमुख शब्दालंकार है सामान्य रूप से यमक का लक्षण यह है कि जहां शब्दों की आवृत्ति हो और अर्थ भिन्न-भिन्न हो यमक अलंकार काल आता है।

यमक अलंकार किसे कहते है?

कहै कवि बेनी, बेनी व्याल की चुराई लीनी।

रति रति सोभा सब रति के शरीर की।

पहले पंक्ति में बेनी शब्द की आवृत्ति दो बार हुयी है।Yamak Alankar Kise Kahate Hainपहली बार प्रयुक्त शब्द “बेनी” कवि का नाम है तथा दूसरी बार प्रयुक्त “बेनी”  का अर्थ है “चोटी” । इसी प्रकार दूसरी पंक्ति में प्रयुक्त “रति -रति” शब्द तीन बार प्रयुक्त हुआ है। Yamak Alankar Kise Kahate Hainपहली बार प्रयुक्त “रति रति” का अर्थ है “रत्ती”के समीप  जरा जरा सी और दूसरे स्थान पर प्रयुक्त “रति” का अर्थ है-कामदेव की परम  सुंदर पत्नी “रति” इस प्रकार बेनी और रति शब्दों की आवृत्ति  में चमत्कार उत्पन्न किया गया है।

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काली घटा का घमंड घटा,

नभ मंडल तारक वृन्द खिले।

उपर्युक्त काब्य पंक्ति में शरद के आगमन पर उसके सौंदर्य का चित्रण किया गया है।Yamak Alankar Kise Kahate Hain वर्षा बीत गई है, शरद ऋतु आ गई है। काली घटा का घमंड घट गया है। “घटा” शब्द के दो विभिन्न अर्थ है- घटा= काले बादल और घटा= कम हो गया। घटा शब्द ने इस पंकित में सौंदर्य उतपन्न कर दिया है। यह यमक का सौंदर्य है।  इसलिए यहां पर यमक अलंकार होगा।

भजन कह्यौ ताते भज्यौ, भज्यौ न एको बार।

दूरि भजन जाते कह्यौ,सो तू भज्यौ गँवार।

प्रस्तुत दोहे में भजन और  भज्यौ शब्दों की पुनरावृति हुई है। भजन शब्द के दो अर्थ हैं- भजन= भजन पूजन और भजन= भाग जाना, इसी प्रकार भज्यौ के भी दो अर्थ है- भज्यौ= भजन किया और भज्यौ= भाग गया।

इस प्रकार भजन और भज्यौ शब्दों की आवृत्ति ने इस दोहे में चमत्कार उत्पन्न कर दिया है।Yamak Alankar Kise Kahate Hain कवि अपने मन को फटकारता  हुवा कहता है-हे मेरे मन ! जिस परमात्मा का मैंने तुझे भजन करने को कहा, तू उससे भाग खड़ा हुआ और जिन विषय वासनाओं से भाग जाने के लिए कहा, तू उन्हीं की अराधना  करता रहा।  इस प्रकार इन भिन्नार्थक शब्दों की आवृत्ति ने इस दोहे में सौंदर्य उत्पन्न कर दिया है। अतः यहां पर यमक अलंकार होगा।

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यमक अलंकार के 2 भेद होते है।

(1) अभंग पद यमक अलंकार

जहाँ दो पूर्ण शब्दों की समानता हो। इसमें शब्द पूर्ण होने के कारण दोनों शब्द  सार्थक होते हैं ।

जैसे – कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय ।

यहाँ पर कनक कनक शब्द दो बार आया है और यह समान है । अतः यह अभंग पद यमक अलंकार है।

(2) सभंग पद यमक अलंकार

यहाँ शब्दों को भंग करके (तोड़कर) अक्षर समूह की समता बनती है। इसमें एक या दोनों अक्षर समूह निरर्थक होते हैं।

जैसे – बैरी बर छीने बरछीने,बैरी भाले भा ले निकले ।

यहाँ पर बरछीने शब्द दो बार आया है पर ये समान नही है पहले में एक साथ लिखा है जबकि दूसरी बार अलग अलग तोड़कर ।

यहाँ पर सभंग पद यमक अलंकार है।

आर्टिकल में अपने पढ़ा कि यमक अलंकार किसे कहते हैं, हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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